ताइवान क्यों दुनिया के लिए महत्वपूर्ण, world news

ताइवान क्यों महत्वपूर्ण दुनिया के लिए -
ताइवान चीन का मामला इस समय दुनिया में नंबर वन खबर के ऊपर ट्रेंड हो रहा है, चीन ताइवान को चारों तरफ से घेर कर मिसाइलों से ताइवान के आकाश से  ताइवान के दूसरी तरफ मिसाइलों से हमला कर रहा है,
 वह ताइवान को मानसिक प्रेशर के अंदर लाना चाह रहा है, चीन के एक महान दार्शनिक ने यह बात बताई थी कि दुश्मन को युद्ध किए बिना है उसे युद्ध में परास्त कर दिया जाए तो यह दुनिया का सबसे अच्छा रण कौशल  होती है,
 पूरी दुनिया में ताइवान के मुद्दे पर चीन घिर चुका है, यूरोप और अमेरिका पूरी तरह से आक्रामक तरीके से ताइवान के साथ खड़े हैं,
 वहीं दूसरी तरफ भारत की सरकार इस मामले में मौन साधे है, अब भारत सरकार का मौन क्या डर है या मजबूरी है,यह समझ के परे है, क्योंकि जो चीन भारत के भूभाग अरुणाचल प्रदेश को भारत का हिस्सा मानने के लिए तैयार नहीं है, जो चीन कभी भारत के उत्तराखंड के ऊपर भी अपना दावा ठोकने लगता है, जो चीन भारत को हर समय नुकसान पहुंचाने की चाहत मन में रखता है, उस चीन को भारत के उदारवादी सरकार ओलंपिक खेल के समय भी अपना समर्थन दिया और अब ताइवान के मुद्दे पर भी मौन साध कर उचित समय की राह देख कर मौन समर्थन दे रही है,
 दूसरी तरफ ताइवान दुनिया के लिए बेहद जरूरी और खास क्यों है आज किसी विषय पर भी हम चर्चा करेंगे,ताइवान च‍िप की मैन्‍यूफैक्‍चरिंग करने वाला प्रमुख देश है। खास बात यह है कि वह दुनिया में सबसे आधुनिक चिप की सप्‍लाई करता है। दुनिया की सेमीकंडक्‍टर इंडस्‍ट्री की खपत पूरी करने में इसकी हिस्‍सेदारी 9 फीसदी है। चीन न केवल निर्माण बल्कि खपत के लिहाज से बड़ा देश है। अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती टेंशन पूरी दुनिया में सेमीकंडक्‍टर इंडस्‍ट्री की सप्‍लाई पर असर डाल सकती है। भारत भी इससे अछूता नहीं रहेगा। अगर ऐसा होता है तो मोबाइल, टीवी, लैपटॉप से लेकर तमाम इलेक्‍ट्रॉनिक वस्‍तुओं की कीमतों पर असर पड़ सकता हैपिछले दो साल से भारत भी सेमीकंडक्‍टर इंडस्‍ट्री किल्‍लत का सामना कर रही है। ताइवान पर अमेरिका और चीन के तेवर से इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स उपकरण बनाने वाली भारतीय कंपनियों की समस्‍या और बढ़ गई है। यह पूरा घटनाक्रम ग्‍लोबल सप्‍लाई चेन पर असर डाल सकता है🙏ताइवान सेमीकंडक्‍टर या चिप खपत को पूरा करने वाले प्रमुख देशों में है। अमेरिका, चीन, दक्षिण कोरिया, जापान और यूरोप भी इसकी मैन्‍यूफैक्‍चरिंग करने वाले खिलाड़‍ियों में शामिल हैं। दुनिया में चिप बनाने वाली जितनी कंपनियां हैं, उनमें से 9 फीसदी का मुख्‍यालय ताइवान में है। अमेरिका की हिस्‍सेदारी 33 फीसदी और चीन की 26 फीसदी है। खपत के लिहाज से देखें तो अमेरिका 25 फीसदी के साथ पहले नंबर पर है। इसके बाद चीन आता है। दुनिया की कुल खपत में उसकी हिस्‍सेदारी 24 फीसदी है। यूरोप 20 फीसदी के साथ तीसरे स्‍थान पर है। दक्षिण कोरिया और जापान की खपत 6-6 फीसदी है।केंद्र  की मोदी सरकार ने देश में सेमीकंडक्टर फैब और डिस्प्ले फैब बनाने करने के लिए दिसंबर 2021 में 76,000 करोड़ रुपये के खर्च को मंजूरी दी थी। इस साल फरवरी में उसे आवेदन भी मिले। हालांकि, आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय के इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) से अब तक आवेदनों को मंजूरी नहीं मिल पाई है।🙏तकनीक और सेमीकंडक्टर बाजार में ताइवान का बड़ा योगदान है। दुनियाभर के 90 प्रतिशत आधुनिक सेमीकंडक्टर ताइवान ही बनाता है। बीते साल ही ताइवान ने 118 अरब डॉलर का सिर्फ सेमीकंडक्टर निर्यात किया है। ताइवान की कंपनी  दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियों के लिए चिप बनाती है,अमेरिकी अधिकारियों ने ट्रंप प्रशासन के दौरान महसूस करना शुरू कर दिया था कि अमेरिकी सेमीकंडक्टर डिजाइन कंपनियां, जैसे कि इंटेल, अपने उत्पादों के निर्माण के लिए एशियाई-आधारित आपूर्ति श्रृंखलाओं पर बहुत अधिक निर्भर थीं. विशेष रूप से, सेमीकंडक्टर निर्माण की दुनिया में ताइवान की स्थिति कुछ हद तक ओपेक में सऊदी अरब की स्थिति की तरह है. T S M Cकी वैश्विक फाउंड्री बाजार में 53% बाजार हिस्सेदारी है। अन्य ताइवान स्थित निर्माता बाजार के 10% हिस्से पर अपना दावा रखते हैं.इस प्रकार ताइवान भारत के लिए भी अति आवश्यक है, पर भारत की उदारवादी सरकार से भारत की जनता मांग करती है की हम ताइवान का समर्थन करे, चीन दुनिया के साथ भारत के लिए भी खतरा है, नमस्कार जय हिन्द जय भारत,

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