चीन से क्यों विकास मे पिछड़ा भारत, History

आइये आज हम उस बिंदु पर चर्चा करेंगे की भारत चीन से क्यों पिछड़ गया? क्या कारण थे  की चीन आज हमसे आर्थिक आधार पर पांच गुना आगे हो गया?1962 मे महावीर और बुद्ध की शांतिपूर्ण धरती युद्ध भूमि में बदल गई थी।अपने इतिहास में हिंदुस्तान ने कई लड़ाइयां लड़ी और लगभग हर बार देश को जीत का गौरव मिला। लेकिन एक युद्ध ऐसा था जो दरअसल युद्ध नहीं छल और धोखेबाज चीन की कहानी थी । जब दोस्ती की पीठ पर दगाबाजी का खंजर चलाया जाता है! तो उसे 1962 का भारत चीन युद्ध कहते हैं। तब दोस्ती का भरोसा हिंदुस्तान का था, विश्वासघात का खंजर चीन का। उस युद्ध में हार से ज्यादा अपमान का लहू निकला। 1962 के भारत चीन युद्ध को कौन भूल सकता है। 62 कि वह तबाही को कौन भूल सकता है!जो चीन ने बरपाई!लेकिन उसके साथ ही हिंदुस्तान ने याद रखा एक सबक कि दोबारा 62 जैसी नौबत ना आए। चीन ने पिछले छह दशकों से केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में लगभग 38,000 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र पर अवैध कब्जा जारी रखा है। 1963 में हस्ताक्षरित तथाकथित चीन-पाकिस्तान 'सीमा समझौते' के तहत पाकिस्तान ने लद्दाख में अवैध रूप से कब्जे वाले क्षेत्रों से शक्सगाम घाटी में 5,180 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र को चीन को सौंप दिया था। भारत सरकार ने 1963 के तथाकथित चीन-पाकिस्तान 'सीमा समझौते' को कभी मान्यता नहीं दी और लगातार इसे अवैध और अमान्य बताया है।
1 जुलाई 2021, चीन और भारत दोनों के लिए महत्वपूर्ण तारीख है. इसी दिन 100 साल पहले शंघाई में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी  का गठन हुआ था!और 30 साल पहले भारत ने मुक्त बाजार अर्थव्यवस्था को अपनाने के लिए, समाजवाद का चोला उतार फेंका था.!1940 के दशक के अंत में चीन और भारत की नियति इतिहास में क्षण भर के लिए एक ही मोड़ पर खड़ी थी.!ब्रिटिश संसद ने भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम,1947 पारित किया! और 15 अगस्त 1947 को भारत को औपनिवेशिक शासन से मुक्त करने के लिए शाही सहमति प्रदान की गई!. बमुश्किल से 2 साल बाद 1 अक्टूबर 1949 को, बीजिंग के एक विशाल रैली में माओ ने 'पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना' की स्थापना की.,!इतिहास के इस मोड़ पर दोनों क्षण भर के लिए साथ थे.! चीन जहां एक अधिनायकवादी राज्य बन गया,वहीं भारत संसदीय लोकतंत्र.!फिर ये दो प्राचीन सभ्यताएं एक दूसरे से दूर चली गईं.!अंग्रेज अक्सर अपने शासन की व्याख्या भारत को 'सभ्य' बनाने के रूप में करते थे.! इसके विपरीत चीन का औपनिवेशिक इतिहास कई क्रूर शासकों के अधीन कहीं अधिक अशांत था!,साम्यवाद की जबरन वसूली की शक्ति का प्रयोग करते हुए, चीन ने 1970 से 1990 के दशक में बड़े पैमाने पर,इन वर्गों से अत्यधिक मुनाफा कमाया!:ये मुनाफा उसी पैमाने पर थी,जैसा स्टालिन के अधीन रूस में हुआ करती थी.! लेकिन फिर चीन के शासक देंग ने कहानी में एक ट्विस्ट ला दिया.! सोवियत संघ के विपरीत उन्होंने जापान की आर्थिक क्रांति से सीख लेते हुए, चीन को विदेशी व्यापार और निवेश के लिए खोल दिया.!चीनी नेता देंग ने अपने 'कम्युनिस्ट मुनाफे' का उपयोग भौतिक संपत्ति और सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर में,उस पैमाने पर निवेश करने के लिए किया,जो अब तक मानव इतिहास के लिए अज्ञात था,!एक समय पर चीन अपने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी )का लगभग, 50% इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश कर रहा था.,!उन्होंने चीन को "दुनिया की फैक्ट्री" बनाने के लिये विदेशी निवेशकों को सस्ती जमीन, श्रम और करेंसी की सहायता से आकर्षित किया!  और उसके लिए 'मुनाफे' का एक अच्छा-खासा हिस्सा भी इस्तेमाल किया.! जितना अधिक पश्चिमी देश चीन से निर्यात करते,!उतना ही अधिक मुनाफा वे कृत्रिम रूप से मूल्यह्रास हुए युआन के कारण मैनलैंड चीन में जमा करते जाते.! ,अब भारत के लिए समस्या 1991 में सद्दाम हुसैन ने ख़डी की!सद्दाम ने कुवैत पर हमला किया,और भारत के लिए 'तेल संकट' की शुरुआत हो गई.! सरकार को अपने कर्ज में चूक से बचने के लिए 67 टन सोना गिरवी रखना पड़ा.! हमारे बॉन्ड को रद्दी के स्टेटस में डाउनग्रेड कर दिया गया.!महत्वपूर्ण आयातों का भुगतान करने के लिए हमारे पास विदेशी मुद्रा लगभग समाप्त हो गई थी.! .चीन 1998 में एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन गया था और भारत ने 2007 में यह मुकाम हासिल किया.यानि हम चीन से 9 साल पिछड़ गये,!
इससे भी अधिक उल्लेखनीय रूप से भारत ने एक प्रमुख पैरामीटर पर, चीन की तुलना में तेजी से बढ़ना शुरू कर दिया था.! याद रखें उच्च मुद्रास्फीति और उच्च विकास दर वाले उन वर्षों में हमारी नॉमिनल जीडीपी, 13 से 15% की दर से आगे बढ़ रही थी!जबकि कर्ज में डूबा चीन दहाई नहीं छुपा रहा था.!भारत ने कभी भी बैड ऐसेट के कारण कराहते बैंकों की बैलेंस शीट को नहीं सुधारा,! उत्पादकता में सुधार के लिए हमने शायद ही कुछ किया!और किराए की मांग वाली राजकीय नीतियों में फंस गए.,! सबसे पहले हम पर 1962 में प्रहार हुआ जब चीन ने अक्साई चिन को हथियाने के लिए एक क्रूर युद्ध में हम पर गोलाबारी की.!यह घटना भारत के विकास मे एक बाधा थी!दूसरा 1991 में जहां भारत और चीन की प्रति व्यक्ति आय बराबर थी! वहीं आज वह 5 गुना आगे है.! आज उसकी जीडीपी 15 ट्रिलियन डॉलर से आगे है! जबकि हम 3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं!. हम देखें तो यह एक प्रत्यक्ष कारण था जो मैंने उपरोक्त आपको बताया, किंतु इसके पीछे भी एक छुपा कारण है, जो चीन जिसके कारण भारत से आगे होता चला गया!रूस और चीन के बीच एक युद्ध होता है!,दोनों देशों ने विदेशी कम्युनिस्ट राज्यों और राजनीतिक आंदोलनों पर नियंत्रण के लिए प्रतिस्पर्धा की,! और कई देशों में दो प्रतिद्वंद्वी कम्युनिस्ट पार्टियां थीं!जिन्होंने एक-दूसरे पर अपनी ताकत केंद्रित की। 1969 में, दोनों देशों के बीच एक संक्षिप्त सीमा युद्ध हुआ।, इस युद्ध के बाद चीन पश्चिमी देशों और अमेरिका का एक दुलारा साथी बन गया,! पश्चिम देश और अमेरिका रूस से अपने शत्रुता को और अधिक मजबूती देने के लिए तत्कालीन रूस और चीन के युद्ध के बाद, वह चीन के तरफ अपना झुकाव कर दे,!
 रूस को कमजोर करने के लिए पश्चिम देश और अमेरिका ने चीन को मजबूत बनाने के लिए कार्य किया!अमेरिका और यूरोप की कंपनियों ने अपने धन का निवेश चीन के अंदर करना शुरू कर दिया,!जिससे चीन का विकास तेजी से हुआ!इस प्रकार रूस और चीन के युद्ध के बाद पश्चिम देश और  अमेरिका के भारी निवेश चीन मे किया!एक फैक्ट्री के रूप में  चीन खड़ा हो गया,जो दुनिया की फैक्ट्री कहलाने लगा,! वहीं भारत रूस के साथ अपनी दोस्ती का खामियाजा इन पश्चिम देशों और अमेरिका के भेदभाव के कारण होता चला गया, !!यह सभी देश भारत के खिलाफ भी रूस जैसा व्यवहार  करने लगे,! और भारत को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाने लगे,! दूसरी तरफ यह चीन को बराबर मजबूती प्रदान करते चले गए,! इस प्रकार उपरोक्त कई ऐसे कारण थे जिसके कारण भारत चीन से पिछड़ता चला गया,!
 1962 के युद्ध के बाद भारत के राजनेता जैसे चीन से डरने लगे,! किंतु एक सुनहरा वक्त 2014 के बाद आया है, जब मोदी सरकार सत्ता में आई,और उसने चीन के खिलाफ चीन की जैसा ही व्यवहार करना शुरू कर दिया,!
 1962 से लेकर 2014 के बीच में कोई भी सशक्त राजनेता भारत की आर्थिक मजबूती के लिए कोई कार्य नहीं किया!  जिसके कारण हम पिछड़ते चले गये,, चीन से पिछड़ने का प्रमुख कारण हमने को यहां पर समझाने की कोशिश की,!मेरा प्रयास अगर आपको पसंद है तो कमेंट बॉक्स मे अपनी राय दे!चैनल को लाइक और suscribe करे ,!धन्यवाद

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