यूरोपीय यूनियन का भारत के साथ फ्री ट्रेड का एग्रीमेंट (world news )

 🇮🇳🇮🇳बड़ी खबरें आ रही है कि 27 जून 2022 को यूरोपीय यूनियन का प्रतिनिधिमंडल भारत आ रहा है,  यूरोपीय यूनियन और भारत के बीच में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर साइन होगा,  इस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से दोनों देशों का फायदा होगा,  भारत का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भारत के सामान यूरोप के देशों में सस्ते रेट पर चला बिकेगा ,  इसके पहले भारत का सामान जो भी यूरोप जाता था,  यूरोप के देशों में  भारी-भरकम टैक्स समानो पर वसूल करते थे,  भारी चार्ज लगने के कारण भारत का सामान चीन के सामानों से महंगा होता था,  जिसके कारण  चीन के सामान अधिक मात्रा में यूरोप के देशों में बिकते थे, और भारत के सामान प्रतिस्पर्धा में महंगी होने के कारण बाहर हो जाते थे, 
 चीन के ऊपर यूरोपीय यूनियन पिछले 20 25 सालों से मेहरबान रहा है,  आधुनिक चीन के उदय मे सबसे बड़ा कारण यूरोप और अमेरिका के बाज़ारो का है, आज चीन की अर्थव्यवस्था अमेरिका की अर्थव्यवस्था को टक्कर दे रही है तो इसके लिए अमेरिका और यूरोप के बाजारों से चीन के द्वारा किया गया व्यापार ही सबसे बड़ा कारण है,  आज के करीब 9 साल पहले भारत यूरोप के यूनियन से फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को साइन करना चाहता था,  किंतु यूरोपीय यूनियन इसके लिए तैयार नहीं हुआ,  यूरोपीय यूनियन के तैयार ना होने के इसमें कुछ दो महत्वपूर्ण बिंदु थे,  पहला कारण यह था कि यूरोपीय यूनियन आंख बंद करके चीन के ऊपर विश्वास करता था, चीन भारी दबाव यूरोपीय यूनियन के देशों पर देकर कर भारत के फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को कैंसिल कराया,  दूसरा कारण  भारत और रूस के करीब होने के कारण यूरोप के देश भारत की सामानों पर भारी शुल्क लगाते थे,  वहीं चीन अमेरिका के गुट था इसलिए चीन को भारी छूट मिलते थे,  किंतु 9 साल बाद आज समय बदल गया है,  करोना कॉल के संकट के समय चीन का चरित्र पूरी दुनिया के सामने उजागर हो गया,  चीन अब यूरोपीय यूनियन व अमेरिका को दबाने मे  लगा,  चीन का राष्ट्रपति अपने देश में लॉकडाउन लगाकर अमेरिका और यूरोप के सभी भारी कंपनियों को बंद करा दिया था, जिसके कारण यूरोप और अमेरिका के बाजारों में सामान की नहीं पहुंचने के कारण यूरोप और अमेरिका में महंगाई चरम पर पहुंच गई है,  अमेरिका और यूरोप 40 साल की सबसे बड़ी महगाई को सहन कर रहे है, यूरोप को अब लगने लगा है कि चीन उनका शोषण कर रहा है यूरोपीय यूनियन अब यह जान गया कि चीन पर निर्भरता खतरनाक है,  चीन को दुनिया की फैक्ट्री कहा जाता है अगर चीन के ऊपर पूरी दुनिया निर्भर रहेगी तो चीन पूरी दुनिया का सप्लाई रोक देगा,  इसलिए यूरोपीय यूनियन के देश अब चीन के बजाय भारत के ऊपर भी अपना निर्भरता को बढ़ाना चाहते हैं,  जिससे कि भविष्य में अगर चीन धोखा दे,  तब भी यूरोपीय यूनियन को किसी भी समस्या का सामना न करना पड़े,  अब इस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट में भारत के पढ़े लिखे लोगों को यूरोप के देशों में अधिक वीजा दिया जाएगा जिससे कि वह यूरोप के देशों में आसानी से काम पा सके,  दुनिया के बदलते समीकरण ने आज भारत को एक महत्वपूर्ण स्थान पर खड़ा कर दिया है,  दुनिया को भारत पर भरोसा है,  दुनिया की सप्लाई  मजबूत बनाने के लिए आज यूरोपीय यूनियन अमेरिका और पूरी दुनिया को भारत के ऊपर सबसे अधिक विश्वास है,  इसी बात को ध्यान रखते हुए इसी महीने की 27 जून को यूरोपीय यूनियन का प्रतिनिधिमंडल भारत आ रहा है,  जो भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के ऊपर साइन करेगा🇦🇺🇦🇨🇨🇻🇮🇳

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