जापान की यात्रा के लिए चीन के राष्ट्रपति क्यों बेचैन है?
चीन जापान और भारत, चीन बेचैन चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग आखिर जापान की यात्रा क्यों करना चाहते है??
यह एक बड़ा प्रश्न है, चीन के राष्ट्रपति जापान क्यों जाना चाहते है, अगर इसका सटीक विश्लेषण करें तो चीन के बारे मे यह सब जानते है की उसे व्यापार ही सब कुछ है, आज उसकी दादागिरी, और अकड़ की जड़ है व्यापार, अगर व्यापार खत्म हो जायेगा तो चीन ईरान की तरह हो जायेगा !
पर चीन एक तरफ अपने पड़ोसियों की एक एक इंच जमीन भी कब्जा कर रहा है, वही दूसरी तरफ उनसे पैसा भी कमा रहा है, और उन देशो से यह अपेक्षा रख़ रहा है की वह चीन का सहयोग करें, और चीन को दुनिया का बिग बास भी माने, !
चीन की अकड़ और पैसा सब दूसरे देशो के भीख पर है, चीन की शक्ति, चीन की अकड़, सब यूरोप के देश जापान और अमेरिका से व्यापार से कमाए गए पैसो से है, अगर यह व्यापार कम हो जायेगा तो चीन की अकड़ और दादागिरी भी खत्म हो जायेगा,
अब चीन यह चाहता है की जापान, यूरोप के देश और अमेरिका की कम्पनिया किसी भी क़ीमत पर चीन को ना छोड़े, अगर यह कम्पनियो ने चीन को छोड़ दिया तो चीन खत्म हो जायेगा, और इस कार्य मे जापान डट कर खड़ा है
जापान चाहता है की जापान की कंपनीया किसी भी क़ीमत पर चीन से हटे और उसके लिए जापान सरकार सहयोग भी कर रही है, अगर यह कम्पनिया हट गयीं तो चीन को बड़ी चोट होंगी,
जापान ऐसा कार्य ना करें, यह चीन चाहता है इसी कार्य के लिए चीन के राष्टपति जापान जाना चाहते है
दूसरा जो कारण है की चीन के राष्टपति एक तरीके से जापान से निवेदन करना चाह रहे है की जापान क्वाड देशो के ग्रुप मे ना जाये
अगर इन मामलो को देखा जाय तो चीन की जापान यात्रा एक तरह से चीन की पराजय को दिखा रहा है, चीन हार की कगार पर खड़ा है
भारत को आत्मनिर्भर भारत की मुहीम को गति देना चाहिए, चीन के अर्थव्यवस्था की जान यूरोप के देश है उसमे भी जर्मनी प्रमुख है, भारत सरकार को अगर चीन की पराजय करनी है तो यूरोप के देशो पर फोकस करना होगा,
जर्मनी का निवेश व कम्पनिया अगर भारत मे होगा तो चीन की यह जापान के बाद सबसे बड़ी हार होंगी, जर्मनी अगर भारत मे निवेश करेगा जो की चीन किसी भी क़ीमत पर नहीं चाहेगा, भारत सरकार अगर जर्मनी की कम्पनियो को भारत के आत्मनिर्भर भारत मे लाने मे कामयाब होंगी तो चीन की यह जापान के बाद यह दूसरी बड़ी हार होगी
चीन एक कमजोर देश है, केवल मनोविज्ञानिक लड़ाई लडता है,
मोदी सरकार जापान, जर्मनी यूरोप के दूसरे देशो के निवेश को खींचे, यही चीन की सबसे बड़ी पराजय होंगी,
भारत सरकार जर्मनी फ्रांस ग्रीस, इंग्लैंड, इटली के निवेश और कम्पनियो को भारत मे लाये
चीन अब हार रहा है


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